हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय| साहित्यिक परिचय| भाषा शैली 2023

इस लेख के माध्यम से हम हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय विस्तार पूर्वक पड़ेंगे। परसाई जी का जीवन परिचय कक्षा 9 कक्षा 10 कक्षा 11 कक्षा 12 के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय हिंदी के पेपर में अक्सर पूछा जाता है।

तो आप कक्षा 9th से कक्षा 12th के छात्र हैं। तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें। क्योंकि यहां पर हम हरिशंकर परसाई के बारे में यह सब पढ़ेंगे,

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हरिशंकर परसाई के उपन्यास, हरिशंकर परसाई की भाषा शैली, हरिशंकर परसाई की साहित्य में स्थान, आदि।

प्रश्न उत्तर को विस्तार में पड़ेंगे। प्रीय छात्रों अगर आप harishankar parsai ka jivan parichay विस्तार मैं समझना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक पढ़े हैं।

यहां आपको यह सब जानकारी मिलेगी

Harishankar Parsai Biography In Hindi (हरिशंकर परसाई की जीवनी)

नाम हरिशंकर परसाई
जन्म कब हुआ 22 अगस्त 1924 ईस्वी में
जन्म स्थान मध्यप्रदेश, में इटारसी के पास जमानी नाम के गांवों में
शिक्षा M.a. हिंदी भाषा से 
संपादन वसुधा और पत्रिका
लेखन विधा व्यंग
भाषा शैली भाषा – सरल, खड़ीबोली, और प्रबहमयी थी।शैली – आत्मपरक व्यंग्यात्मक
प्रमूख रचनाए रानी नागफनी की कहानी, सदाचार का ताबीज, जैसे उनके दिन फिरे, आदि।
साहित्य में स्थान हरिशंकर परसाई जी लेखकारो के साथ में आधुनिक युग के व्यंग्यकारो में सदैव स्मरणीय हैं।
निधन सन 1995 ईस्वी में।
Harishankar Parsai Biography

हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय

हरिशंकर परसाई का जन्म 22 अगस्त 1924 ईस्वी में मध्यप्रदेश के इटारसी के पास जमानी नाम के गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम जुमक लालू प्रसाद और माता का नाम चम्पा बाई था। परसाई जी की प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश में हुई। और नागपुर विश्वविद्यालय से प्रसाद जी ने हिंदी भाषा में m.a. की डिग्री उत्तीर्ण की। M.a. डिग्री प्राप्त करने के बाद प्रसाद जी ने कुछ समय तक अध्यापन कार्य यानी के टीचर का काम किया। लेकिन परसाई जी की साहित्य में विशेष रूचि थी इसी कारण से इन्होंने अध्यापन का कार्य छोड़ दिया और स्वतंत्र रूप से स्वयं को लेखन कार्य में लगा दिया, और इसी के साथ में यह साहित्य सेवा में जुट गए। हरिशंकर परसाई जी ने वसुधा नामक, साहित्यिक मासिक, पत्रिका का स्वयं संपादन तथा प्रकाशन किया था। लेकिन बाद में आर्थिक क्षति होने के कारण इनकी इन पत्रिकाओं के प्रकाशन को बंद कर दिया गया। इस महान लेखक का 10 अगस्त 1995 ईस्वी में स्वर्गवास हो गया।

हरिशंकर परसाई का साहित्यिक परिचय

हरिशंकर परसाई जी ने साहित्य सेवा के लिए नौकरी को छोड़ दिया और यह स्वतंत्र लेखन को ही अपना मुख्य उद्देश्य समझते थे, और स्वतंत्र लेखन का मुख्य उद्देश्य समझकर ही साहित्य साधना में हमेशा जुटे रहे। और उन्होंने सामाजिक विसंगतियों और व्यक्तिगत दोषों को निराकरण करने वाले व्यंग्यात्मक निबंधों के अतिरिक्त परसाई जी ने कहानियां और उपन्यास को लिखा। कहानी और उपन्यास के साथ में प्रसाद जी ने निबंध को भी लिखा है।

हरिशंकर परसाई की कृतियां

हरिशंकर परसाई जी ने विभिन्न विषयों पर रचनाएं लिखी हैं, इनकी रचनाएं देश की प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं पर प्रकाशित हुई हैं, इन्होंने कहानी, उपन्यास निबंध, आदि। लिखे हैं सभी विधाओं में लेखन कार्य किया परसाई जी की रचनाओं का उल्लेख कुछ इस प्रकार है।

हरिशंकर परसाई का निबंध संग्रह है

हरिशंकर परसाई जी की अनेक निबंध संग्रह है जिनके नाम निम्नलिखित हैं। 

तब की बात और थी, बेईमान की परत, भूत के पांव पीछे, पगडंडियों का जमाना, सदाचार का ताबीज, शिकायत मुझे भी है, आदि।

हरिशंकर परसाई के उपन्यास

प्रसिद्ध उपन्यासों के नाम – रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज, सदाचार का ताबीज, आदि।

हरिशंकर परसाई की कहानियां

कहानी-संग्रह – रोते हैं, हंसते हैं, जैसे उनके दिन फिरे, यह सब कहानी संग्रह हरिशंकर परसाई जी के हैं।

हरिशंकर परसाई की भाषा शैली

हरिशंकर परसाई जी की भाषा और शैली कुछ इस प्रकार है आइए एक-एक करके समझते हैं।

भाषा

हरिशंकर परसाई ने सरल प्रभावी एवं बोलचाल की भाषा को अपनाया था, यह सरल एवं व्यवहारिक भाषा के पक्षपाती रहे थे। परसाई जी व्यवहारिक भाषा कारण साधारण पाठक है, सबसे बड़ी बात इनकी साहित्य परिस्थितियों को आसानी से समझ सकता है, इनकी भाषा गंभीर और क्लिष्ट यानी के कठिन ना होकर शुद्ध सरल तथा व्यवहारिक है, इनकी रचनाओं के वाक्य छोटे छोटे है। इनके सभी अंगों का विषय सामाजिक व राजनीतिक विषय है, भाषा में व्यवहारिकता को लाने के लिए परसाई जी ने उर्दू, अंग्रेजी के शब्दों का उपयोग किया था, जैसे – टॉनिक, मिशनरी, कैटलॉग, दगाबाज, आदि। कहीं-कहीं पर मुहावरे एवं कहावतों का प्रयोग भी किया था।

शैली

हरिशंकर परसाई की शैली के मुख्य रूप से तीन प्रकार हैं। परसाई जी की मुख्य शैली व्यंग्य प्रधान हैं,व्यंग्य प्रधान शैली का नाम लेते ही पाठक को हरिशंकर परसाई का नाम स्वयं याद हो जाता है क्योंकि यह एक सफल व्यंग लेखक थे। आइए विस्तार में हरिशंकर परसाई के तीनों शैलीयो को समझते हैं।

  1. व्यंग्यात्मकता शैली – हरिशंकर परसाई ने व्यंग्यात्मकता शैली का उपयोग अधिकतर अपने निबंधों में किया था। इसीलिए यह शैली निबंध ओं का प्राण (आत्मा) है। इस शैली के कारण परसाई जी शैली पर आधारित इनके निबंध और पाठक तथा श्रोता दोनों के लिए रोचक एवं आनंद प्रदान करने वाले बने।
  2. प्रश्ननात्मक शैली – परसाई जी की कुछ-कुछ निबंधों में प्रश्ननात्मक शैली के भी दर्शन हुए हैं, और प्रसाद जी ने प्रश्न के साथ में स्वयं उत्तर भी दिए हैं।
  3. सुत्रात्मकता शैली – परसाई जी अपनी रचनाओं में सुत्रात्मकता वाक्यों का उपयोग करके गागर में सागर भर दिए थे। इनके निबंधों में प्रयुक्त सूत्र वाक्य विचारों को सुगठित रूप में प्रस्तुत करने में सहायक हैं।

हरिशंकर परसाई की साहित्य में स्थान

परसाई जी हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक रहे हैं, इन्होंने मौलिक एवं अर्थ पूर्ण व्यंग्यात्मकता की रचना की है, परसाई जी ने हास्य एवं व्यंग्यप्रधान निबंधों की रचना को करके हिंदी साहित्य को एक नया विशिष्ट अभाव की पूर्ति दी है। परसाई जी ने सबसे ज्यादा समाज और व्यक्ति के कमजोरियों पर तीखा प्रहार किया है।

FAQ – हरिशंकर परसाई के बारे में हमेशा पुछे जाने वाले प्रश्न उत्तर

हरिशंकर परसाई पाठ के प्रश्न उत्तर

हरिशंकर परसाई जी के पाठ का नाम निंदा रस है तो इस पाठ के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर यहां पर आपको नीचे दिए हैं इनको ध्यानपूर्वक पढ़ें।

हरिशंकर परसाई के पिता का नाम

पिता का नाम परसाई जी के जुमक लालू प्रसाद था।

प्रश्न – हरिशंकर परसाई के पिता का नाम

उत्तर, पिता का नाम परसाई जी के जुमक लालू प्रसाद था।

प्रश्न – ninda ras ke lekhak kaun hai

उत्तर, हरिशंकर परसाई की निंदा रस के लेखक हैं।

प्रश्न – हस्ते है रोते है के लेखक कौन है

उत्तर, हरिशंकर परसाई जी।

प्रश्न – जैसे उनके दिन फिरे, कहानी के लेखक का नाम किया है

उत्तर, जैसे उनके दिन फिरे, लेखक का नाम हरिशंकर परसाई है

प्रश्न – हरिशंकर परसाई के किसी एक उपन्यास का नामोल्लेख कीजिए

उत्तर, रानी नागफनी की कहानी, और तट की खोज आदि।

प्रश्न – तब की बात और थी, निबंध संग्रह के रचनाकार का नाम

उत्तर, हरिशंकर परसाई

प्रश्न – किस निबंध के लेखक हरिशंकर परसाई है

उत्तर, तब की बात और थी, भूत के पांव पीछे, आदि। यह सब हरिशंकर परसाई जी के निबंध है।

प्रश्न – तट की खोज रचना है

उत्तर, हरिशंकर परसाई जी ने तट की खोज रचना लिखी है।

प्रश्न – रानी नागफनी की कहानी के लेखक हैं

उत्तर, रानी नागफनी कहानी के लेखक का नाम हरिशंकर परसाई है।

प्रश्न – श्री हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचना क्या है?

उत्तर, तब की बात और थी, भूत के पांव पीछे, बेईमान की परत, आदि।

प्रश्न – हरिशंकर परसाई का मूल नाम क्या है?

उत्तर, परसाई जी

प्रश्न – हरिशंकर परसाई किस युग के लेखक हैं

उत्तर, हरिशंकर परसाई आधुनिक युग के लेखक हैं।

प्रश्न – हरिशंकर परसाई की प्रमुख रचनाएं कौन कौन सी है?

उत्तर, रानी नागफनी की कहानी, सदाचार का ताबीज, जैसे उनके दिन फिरे, तट की खोज, हंसते हैं, रोते हैं, आदि।

संदर्भ

80% छात्रों को संदर्भ लिखना नहीं आता है, 

यहां पर संदर्भ लिखना जरूर सीख ले। मैं आपको यहां पर सिखाऊंगा। और यहां पर प्रसाद जी के पाठ का संदर्भ लिखना सिखाया हूं। संदर्भ में दोस्तों आपको सिर्फ दो बातों को याद रखना होता है सबसे पहले जिसका आप संदर्भ लिख रहे हैं, उसका नाम और उसके पाठ का नाम, संदर्भ कैसे लिखे हिंदी में विस्तार में समझते है।

दोस्तों संदर्भ लिखने से पहले आपको पेपर में दो लाइन दी जाती हैं जिसको पढ़कर आपको पहचानना होता है कि यह लाइन किस पाठ की हैं जैसे कि नीचे दी हैं।

कुछ मिशनरी निंदक मैंने देखे हैं। उनका किसी से बैर नहीं। दोष नहीं बे किसी का बुरा नहीं सोचते। पर 24 घंटे वे निंदा कर्म में बहुत पवित्र भाग से लगे रहते हैं।

तो यह पढ़कर मैंने पहचान लिया है कि यह लाइन को हरिशंकर परसाई के निंदा रस पाठ से लिया गया है। तो अब हम इसका सुंदर कुछ इस प्रकार लिखेंगे।

संदर्भ कैसे लिखे हिंदी में

संदर्भ – इस पाठ के लेखक हरिशंकर परसाई जी हैं और इस पाठ को हिंदी साहित्य से लिया गया है पाठ्य का नाम निंदा रस है।

हिंदी में व्याख्या कैसे लिखें 

दोस्तों पेपर में दो नंबर आपको व्याख्या करने के भी दिए जाते हैं तो व्याख्या करना भी बहुत जरूरी है व्याख्या कैसे करते हैं यह समझते हैं।

सबसे पहले आपको यह ध्यान रखना है जो लाइन से आपको संदर्भ लिखने के लिए कहा जाता है उसी लाइन में कुछ अक्षरों के नीचे सीधी लाइन बनी होती है उसी सीधी लाइन वाले अक्षरों की आपको व्याख्या करनी होती है जैसे कि नीचे दिया है

कुछ मिशनरी निंदक मैंने देखे हैं। उनका किसी से बैर नहीं। दोष नहीं बे किसी का बुरा नहीं सोचते। पर 24 घंटे वे निंदा कर्म में बहुत पवित्र भाग से लगे रहते हैं।

तो इसकी व्याख्या हम कुछ इस प्रकार करेंगे।

मैंने कुछ मिशनरी निंदा को को देखा है। वह किसी से दुश्मनी नहीं रखते और ना ही वह कभी किसी का बुरा करने के बारे में सोचते हैं।

इस तरह से दोस्तों आपको अपने शब्दों में व्याख्या करनी होती हैं उम्मीद करता हूं आपको हिंदी में व्याख्या कैसे लिखें। यह समझ आ गया होगा।

निष्कर्ष

यहां इस लेख में मैंने आपको Harishankar Parsai Biography In Hindi को बहुत आसानी से समझाया है। यह चैप्टर 9 कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए बहुत जरूरी है। अगर आप 9 से 12 वीं कक्षा के छात्र हैं। तो हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय और हरिशंकर परसाई का साहित्यिक परिचय जरूर याद कर ले क्योंकि यह पेपर में 5 नंबर में पूछे जाते हैं तो मैं उम्मीद करता हूं आपको यह लेख पसंद आया होगा और आपको हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय याद भी हो गया होगा ऐसे ही और जानकारी प्राप्त करने के लिए mohibteching.in वेबसाइट को सब्सक्राइब करें। और आपको किस क्लास की मटेरियल चाहिए और किस सब्जेक्ट का मटेरियल चाहिए हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम आपको उसी सब्जेक्ट से रिलेटेड जानकारी देंगे धन्यवाद।

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