डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय कक्षा 12, भाषा शैली

NCERT Class 12th hindi chapter 3| hazari prasad dwivedi Note. Doctor hazari prasad dwivedi ka jeevan parichay hindi main? doctor hazari prasad dwivedi sahityik parichay? हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा शैली कैसी थी?

Doctor hazari prasad dwivedi ki rachna hai? प्रिय छात्रों अगर आप 12वीं कक्षा के छात्र हैं, तो इस पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढ़े यहां आपको Doctor hazari prasad dwivedi का Class 12th hindi chapter 3 पूरा पढ़ाया है।

यहां आपको यह सब जानकारी मिलेगी

Doctor hazari prasad dwivedi ka jeevan parichay hindi main?

डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन 1907 में दुबे का छपरा नाम का गांव बलिया जिले में हुआ था। हजारी प्रसाद द्विवेदी के पिता का नाम अनमोल दुबेदी था। और इनकी माता का नाम ज्योति काली देवी था! प्रसाद जी ने हिंदी, और संस्कृत, भाषाओं का गहन अध्ययन किया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय। शांतिनिकेतन। और पंजाब विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं में हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे थे,

सन 1949 ईस्वी में लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्रसाद जी को डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। और 1957 ईस्वी में भारत सरकार ने पदम भूषण उपाधि से इन्हें सम्मानित किया। और उत्तर प्रदेश में हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष भी रहे, प्रसाद जी सेवा निवृत होने के पश्चात निरंतर साहित्य की सेवा में जुटे रहे। और 19 मई 1979 ईस्वी में इस महान साहित्यकार कि मृत्यु हो गई।

Hazari prasad dwivedi ka jeevan parichay short mein

नाम डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
पिता का नाम अनमोल दुबेदी
जन्म सन 1907 ईस्वी
जन्म स्थानदुबे का छपरा बलिया जिला (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा आचार्य की उपाधि प्राप्त की काशी हिंदू विश्वविद्यालय से
लेखन विधा निबंध, उपन्यास, आलोचना,
भाषा – शैली भाषा – शुद्ध साहित्यिक खड़ीबोली।
शैली – विचारात्मक, अलंकारिक, गवेषणात्मक।
प्रमुख रचनाए सूर साहित्य, कुटज, हिंदी साहित्य की भूमिका, अशोक के फूल, बाणभट्ट की आत्मकथा, आलोक, पर्व, आदि।
निधन 1979
साहित्य में स्थान महान साहित्यकार एवं हिंदी के समालोचक के रूप में

Doctor hazari prasad dwivedi sahityik parichay? (हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक परिचय)

हजारी प्रसाद द्विवेदी आधुनिक युग के गद्यकारों के रूप में मशहूर हैं। हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंधो में जहां साहित्य और संस्कृति की अखंड धारा प्रवाहित होती है, वहीं नित्यप्रति के जीवन की विविध गतिविधियों क्रिया व्यापारो, अनुभूतियों, आदि का भी चित्रण अत्यंत सजीव और मार्मिकता के साथ होता है। आलोचनात्मक साहित्य के सर्जन की दृष्टि से प्रसाद जी का महत्वपूर्ण स्थान है। सूर साहित्य प्रसाद जी की प्रारंभिक आलोचनात्मक कृति है। इसमें भावात्मक अधिक दिखाई देती है। द्विवेदी जी ने चार महत्वपूर्ण उपन्यासों की रचना करी है। सांस्कृतिक, पृष्ठभूमि, पर आधारित या उपन्यास द्विवेदी जी की गंभीर विचार शक्ति को प्रभावित करते हैं। प्रसाद जी ने ललित निबंध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण लेखन कार्य किया था। हिंदी के ललित निबंध को व्यवस्थित रुप प्रदान करने वाले निबंधकार के रूप में हजारी प्रसाद द्विवेदी अग्रणी हैं। प्रसाद जी के ललित निबंधों में रसास्वादन की अपूर्व क्षमता विद्यमान है उनमें भावुकता संस्था और कोमलता के साथ-साथ अब एक पूर्व प्रतिपादन की शैली विद्यमान भी है।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की कृतियां

डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अनेक ग्रंथों की रचना करी है जिनको निम्नलिखित वर्गो मैं प्रस्तुत किया है आइए एक-एक करके पढ़ना शुरू करते हैं।

Hazari prasad dwivedi ka nibandh sangrah kya hai? (हजारी प्रसाद द्विवेदी का निबंध संग्रह कौन सा है)

कुटज, विचार प्रवाह, अशोक के फूल, विचार और वितर्क, आलोक पर्व, कल्प लता, आदि।

हजारी प्रसाद द्विवेदी की आलोचना दृष्टि की विशेषताएं?

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की आलोचना साहित्य कुछ इस प्रकार है। सूर साहित्य, कालिदास की ललित योजना, साहित्य सहचर, कबीर, और साहित्य का मर्म, यह सब डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी की आलोचना साहित्य हैं।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की इतिहास दृष्टि

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का हिंदी साहित्य की भूमिका, हिंदी साहित्य, और हिंदी साहित्य का आदिकाल आदि यह सब इतिहास हैं,

हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास का नाम लिखिए

चारु-चंद्र लेख, अनामदास का पोथा, बाणभट्ट की आत्मकथा, यह सब हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास के नाम हैं।

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका का संपादन किया

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अनेक पत्रिका का संपादन किया है। जैसे कि नाथ सिद्धों की बानिया, संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो, संदेश रासक, आदि।

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की दो रचनाएं

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की कुछ रचनाओं इस प्रकार है।

मेरा बचपन, प्रबंध चिंतामणि, पुरातन प्रबंध संग्रह, लाल कनेर, प्रबंध कोश, विश्व परिचय,

हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा शैली क्या है। अब हम यही पड़ेंगे दोस्तों बहुत से छात्रों को यह पता नहीं होता कि भाषा और शैली अलग-अलग दो प्रकार होते हैं तो हम दोनों को अलग अलग ही आज पढ़ने वाले हैं आइए पढ़ना शुरू करते हैं।

हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा शैली

हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा – डॉक्टर हजारी द्विवेदी की भाषा खड़ी बोली है। इन्होंने भाव और विषय के अनुसार भाषा को चयनित करके प्रयोग किया है।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा के दो रूप दिखाई देते हैं। 1. व्यावहारिक भाषा 2. संस्कृतनिष्ठ शास्त्रीय और द्विवेदी जी ने अपने उपन्यासों में हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, आदि। भाषाओं का भी उपयोग किया है।

हजारी प्रसाद द्विवेदी की शैली

डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं में उनकी शैली के अनेक रूप दिखाई देते हैं।

  • 1. गवेषणात्मक शैली – डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने गवेषणात्मक शैली मैं ही प्राचीन निबंध की रचना की है।
  • 2. व्यक्तिकता शैली वासुदेव शरण अग्रवाल के जब गंभीर स्थलों पर जब प्रसंग में आत्मीयता उत्पन्न हुई है। जब द्विवेदी जी प्रसन्न के साथ स्वयं को जोड़ना चाहते थे। तो उनकी व्यक्ति कता शैली में सहजता, सहायता और काव्यात्मक का गुण मिलते हैं।
  • 3. विचारात्मक शैली प्रशांत जी की ज्यादातर निबंध विचारात्मक हैं साहित्य धार्मिक और संस्कृतिक निबंधों में विचारात्मक शैली विशेष रूप से प्राप्त हुई है द्विवेदी जी ने गंभीर से गंभीर विषय को बड़ी कुशलता और बोधगम्य ढंग से प्रस्तुत किया है।
  • 4. वर्णनात्मक शैली – वासुदेव शरण अग्रवाल जी विषय को सदस्य बनाने के लिए पक शापित हैं इन्होंने कहीं-कहीं वर्णनात्मक का भी आश्रय लिया था द्विवेदी जी वर्णनात्मक शैली इतनी आसानी से समझाते थे कि एक चित्र से प्रस्तुत कर देते थे कि यह वर्णनात्मक शैली है।

हजारी प्रसाद द्विवेदी पाठ के प्रश्न उत्तर

डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी के बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर अब हम पढ़ेंगे। लेकीन उससे पहले हम यह पढ़ लेते है की बहुविकल्पीय प्रश्न क्या होते हैं?

बहुविकल्पीय प्रश्न क्या होते हैं

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर वह प्रश्न उत्तर होते हैं जिसमे एक अक्षर में उत्तर देना होता है। बहुविकल्पी प्रश्न उत्तर जब आप पेपर करने के लिए जाते हैं, तो सबसे पहले आपको एक प्रश्न दिया जाता है। और उस प्रश्न के नीचे चार ऑप्शन आपको दिए जाते हैं जिसमें से जो सही होता है उसको आपको सिलेक्ट करना होता है यही बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर कहलाते हैं। आइए उदाहरण से समझते हैं।

बाणभट्ट की आत्मकथा किसकी रचना है
  1. डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
  2. कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
  3. प्रो जी सुंदर रेड्डी
  4. हरिशंकर परसाई

उत्तर – डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी

जैसे कि आपने यहां पर देखा एक प्रश्न आपसे पूछा गया और उसका उत्तर एक पहचान कर आप से लिया गया है। इसी तरह से बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर किए जाते हैं। आइए अब हम डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी के पाठ्य के सभी बहुविकल्पी प्रश्न उत्तर पड़ेंगे।

कुटज निबंध संग्रह के लेखक कौन है
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
हजारी प्रसाद द्विवेदी की दो रचनाएं बताइए 
  • अशोक के फूल, बाणभट्ट की आत्मकथा,
हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास का नाम लिखिए 
  • पुनर्नवा 
कबीर आलोचना ग्रंथ है 
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
प्रसाद जी की अनूदित रचना कौन है 
  • विचार-विवेचन
अशोक के फूल किसकी रचना है 
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
आलोक पर्व किसकी रचना है 
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
एक उपन्यास की रचना डॉ हजारी प्रसाद द्वारा की गई उसका नाम बताइए
  • पुनर्नवा की 
लाल कनेर किसकी रचना है
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
मेरा बचपन किसकी रचना है 
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
बाणभट्ट की आत्मकथा के लेखक कौन है।
  • डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी
डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी की मृत्यु कब हुई 
  • सन 1979 में 
डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म कब हुआ था 
  • 1907
हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म कहां हुआ था 
  • दुबे का छपरा गांव का नाम और जिला बलिया
हजारी प्रसाद द्विवेदी के पिता का नाम क्या था
  • अनमोल द्विवेदी
निष्कर्ष

तुझे छात्रों इस चैप्टर में हमने आपको डॉक्टर हजारी प्रसाद द्विवेदी का पूरा पाठ पढ़ाया है उम्मीद करता हूं आपको यह पाठ पसंद आया होगा अगर आप कोई जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के पास भी शेयर करें।

Leave a comment