रस कितने प्रकार के होते है ? और रस की परिभाषा किया है ? 2022

दोस्तों स्वागत है आपका mohibteching.in वेबसाइट पर में इस वेबसाइट पर 12वी कक्षा के हिंदी और इसके आलावा बहुत सारी जानकारी देता रहता हु ! आप कौन सी कक्षा में है !

टोपिक पर जानकारी प्राप्त करना चाहते हो जरूर बताय ! अगर आप 10वीं कक्षा या फिर 12वी कक्षा के छात्र हो तो आज आप बिलकुल सही जगह पर आय हो ! आज के इस पोस्ट में हम पढ़ने बाले है ! 

10वीं कक्षा और 12वी कक्षा का हिंदी की किताब का पाठ रस ! आज हम रस कितने प्रकार के होते है ! और रस की परिभाषा किया है यह सब पढ़ने बाले है!


रस कितने प्रकार के होते है ? और रस की परिभाषा किया है ? 2022


रस कितने प्रकार के होते है ?

दोस्तों अगर आपको मालूम नहीं है तो में आपको बता देता हु की रस 10 प्रकार के होते है ! लेकिन इसमें से सबसे  मह्त्बपूर्ण 5 प्रकार के होते है ! और यही 5 रस 10TH और 12TH में पढ़ने होते है यही हम पढ़ने बाले है ! 

तो दोस्तों अब हम सभी के नाम पढ़ लेते है ! 

रस के नाम क्या है ?

1 श्रृंगार रस 
2 शान्त रस 
3 हास्य रस 
4 करुण रस 
5 वीर रस 

अब हम सभी के स्थाय भाब पढ़ते है !

श्रृंगार रस रति 
शान्त रस  शोक 
हास्य रस  निर्वेद 
करुण रस  उत्साह 
वीर रस हास 

अब आप सभी रस के स्थाई भाव पढ़ चुके हो अब हम सभी रस की परिभाषा पढ़ने बाले है !

श्रृंगार रस की परिभाषा किया है ?

जब नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्यार या प्रेम भी कह सकते है ! जब रस की अवस्था को पहुंचने के बाद आस्वादन के योग्य हो जाता है ? तो यह श्रृंगार रस कहलाता है !  

करुण रस की परिभाषा क्या है ?

बिंदु वियोग बिंदु विनाश द्रव्य नाश और प्रेमि का सदैव के लिए बिछड़ जाना इसे करुण रस कहते हैं !

जब दो लडकी लड़के आपस में बहुत ज्यादा प्यार करते हैं और उनका जब बिछड़ने का टाइम आता है और मिलने की कभी भी उम्मीद नहीं रहती है तो इस को करुण रस कहां जाता है !

हास्य रस की परिभाषा क्या है ?

किसी व्यक्ति की वेशभूषा चेष्टा वाणी आदि को देखकर ह्रदय में जलन सी महसूस होती है हृदय में विनोद का भाव जागृत होता है इसी को हास्य रस कहते हैं !

वीर रस की परिभाषा क्या है ?

युद्ध अथवा किसी कठिन कार्य को करने के लिए ह्रदय में जो उत्साह जागृत होता है इसी को वीर रस कहा जाता है !

शांत रस की परिभाषा क्या है ?

संसार से वैराग्य हो जाना ना सुख का पता होना ना दुख का पता होना ना राग और ना कोई इच्छा है ऐसी स्थिति को शांत रस कहा जाता है !

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