पंचलाइट की कहानी का सारांश पूरी जानकारी हिन्दी में

पंचलाइट की कहानी का सारांश दोस्तों क्या आप 12वीं कक्षा में हो और आप पंचलाइट की कहानी का सारांश याद करना चाहते हो ! तो आज आप बिल्कुल सही पोस्ट पर आ चुके हो !

इस आर्टिकल में आपको बहुत ही आसान भाषा में इस आर्टिकल में आपको समझाया जाएगा ! कि पंचलाइट की कहानी का सारांश क्या है और इस कहानी को किस बात के आधार पर बनाया गया है ! 

तो चलिए हम पढ़ना स्टार्ट करते हैं!

दोस्तों आगे बढ़ने से पहले मैं आपको यह बता दूं पंचलाइट की कहानी और धुरव्यात्र की कहानी किसी भी कहानी सिर्फ 12वीं कक्षा में 80 शब्दों में लिखने के लिए कहा जाता है !

सबसे पहले हम इस कहानी का पूरा सारांश पढ़ लेते हैं उसके बाद हम 80 शब्दों में पड़ेंगे !

पंचलाइट की कहानी का सारांश 

सबसे पहले हम यह पढ़ लेते है की पांचलाइट कहानी का किसके ऊपर है ! अगर आप यह जान लेते हो की यह कहानी कसके ऊपर आधारित है तो आपको समझना आसान हो जायगा ! 

पांच लाइट की कहानी एक गाब के लोगो पर आधारित है ! यह महतो टोली के लोग होते है ! 


तो चलिए पढ़ना स्टार्ट करते हैं ! महतो टोली के लोगों ने पिछले 15 महीनों से पैसे को इकट्ठा किया था ! और यह पैसे दंड जुर्माने के थे! जब कोई व्यक्ति गलती करता था तो उसे दंड के पैसे जमा करने पड़ते थे!

फिर वह लोग एक बार रामनवमी के मेले में जाते हैं और वहां पर पेट्रोमैक्स खरीद लेते हैं पेट्रोमैक्स को गांव वाले पंचलाइट कहते हैं लेकिन जब है पेट्रोमैक्स खरीद लेते हैं ! तो उसमें से ₹10 बच जाते हैं !

तो ₹10 को वह पूजा का सामान खरीद लेते हैं और अपने गांव के लिए आने के लिए तैयार हो जाते हैं ! इनके गांव में सबको मिलाकर 8 पंचायतें थी ! और हर जाति की अलग-अलग पंचायत है !

और सभी के पास पंचलाइट सतरंजी जाजिम सभी कुछ मौजूद है लेकिन इन महतो टोली के पास पेट्रोमैक्स नहीं थी लेकिन अब खरीद कर यह जल्द से जल्द घर पहुंच जाते हैं ! 

घर पर आते समय सबसे आगे पंचायत का छड़ी दार पंचलाट का डिब्बा अपने सिर पर रखकर आता है और उसके पीछे सरदार दीवान आता है और उसके पीछे सब गांव के लोग आते हैं !

रास्ते में पंचलाइट को देखकर गांव के महतो टोली के सभी लोग लेडिस मर्द बच्चे बूढ़े सभी लोग काम छोड़कर एक जगह इकट्ठे हो जाते हैं सब कहते हैं कि चलो रे भाई चलो अपना पंचलाइट आया है !
फिर जब सब लोग आ जाते हैं तो वहां का छड़ी दार सब को चेतावनी देने लगता है और कहता है कि पंचलाइट को छू छा मत करो इसे ठेस लग जाएगी फिर सरदार अपनी पत्नी से कहता है शाम को पूजा होगी !

आप जल्द से जाकर नहा धो लो फिर वह चली जाती है और वहां पर सभी लोग इकट्ठे हो जाते हैं फिर रात हो जाती है रात होने के बाद सब लोग अब इंतजार करते हैं कि पंचलाइट जलेगा !

पंचलाइट के पास सभी लोग इकट्ठे होते हैं लेकिन अब सबसे बड़ी बात यह आती है कि पंचलाइट को जलाएगा कौन क्योंकि गांव वालों ने इससे पहले कभी भी कुछ ऐसा नहीं खरीदा था जिससे जलाने बुझाने का काम किया गया हो!

सभी लोग चिंता में रहते हैं कि अब पंचलाइट को चलाएगा कौन लेकिन वहां पर जलाने से पहले रुदल साहब बनिया की दुकान से तीन बोतल किरासन का तेल ले आता है और सभी लोग चिंता में होते हैं !

कि अब पंचलइट को जलाएगा कौन लेकिन दोस्तों मैं आपको बता दूं उस गांव के दूसरे टोली के लोग जानते थे कि पंचलाइट को कैसे चलाया जाता है क्योंकि उनके पास पहले से था !

लेकिन महतो टोली के लोग उनसे जलवाना नहीं चाहते थे क्योंकि वह कहते थे अगर उनसे जलाया तो वह पूरी जिंदगी ताना मारेगे कि आपका पंचलाइट सबसे पहले हमने जलाया था आपसे चलाना भी नहीं आता था !

इस ताने के डर से वह कहते हैं कि इसको ऐसे ही पड़े रहने दो और हम नहीं जाएंगे लेकिन वहां पर गुलरी काकि की बेटी मुनरी खड़ी हुई थी और वह जानती थी कि गोधन पंचलाई को चला सकता है !

और वह पंचलाइट को जलाना जानता है लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि गोधन का पंचायत से आना जाना बंद था और उसने दंड का पैसा नहीं भरा था इसलिए उसे पंचायत से निकाल दिया था !

गोधन सलीमा का गाना गाता था इसलिए उसे निकाला गया था !

फिर मुनरी अपनी सहेली कनेली से कहती है कि गोधन पंचलाइट को जलाना जानता है फिर वह कहती है कि अच्छा गोधन जानता है फिर वह सरदार को बताती है सरदार फिर एक छड़ीदार को भेजता है!
लेकिन गोधन नहीं आता है बह कहता है कि पंचायत के लोगों को मुझसे क्या काम है अगर मुझसे कुछ काम बिगड़ गया तो वह फिर मुझसे दंड माँगा जायगा ! लेकिन वह नहीं आता है फिर वहां खड़ी गुलरी काकी कहती हैं !

ठीक है मैं देखती हूं फिर वह जाती हैं झोपड़ी में गोधन के फिर बह गोधन को मना कर ले आती हैं फिर सभी लोग खुश हो जाते हैं लेकिन इतने में सभी की चिंता बढ़ जाती है क्योंकि गोधन कहता है !

कि इस्प्रिट कहां है क्योंकि वह लोग जानते ही नहीं थे की इस्प्रिट क्या है ! और कहां से लाएं फिर सभी गांव के लोग महतो टोली पंचायत के लोगों से कहते हैं !

कि यह लोग कभी किसी से राय नहीं लेते और खुद ही अपना काम करते हैं अब इस्प्रिट कहां से लाएं लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि गोधन बहुत चालाक लड़का था ! वह बिना इस्प्रिट के ही पंचलाइट को जल आएगा!

फिर वह कहता है कि थोड़ा गरी का तेल लाकर दो फिर मुनरी दौड़ कर जाती है और मल्सी में गरी का तेल लेकर आ जाती है और फिर गोधन पंचलाइट को जलाने लगता है धीरे – धीरे रोशनी आने लगती है!

सभी को खुशी होने लगती है फिर वह सब लोग खुशी मनाते हैं और बाद में गोधन को पंचायत में खोल दिया जाता है सभी लोग उसके पास आने जाने लगते हैं फिर गुलरी काकी कहती हैं !

कि आज की दावत तेरी मेरे घर पर है आज का खाना मेरे घर पर खाना!

यह है गोधन की कहानी जिसको हम लोग पंचलाइट कहते हैं !

पंचलाइट कहानी का सारांश 80 शब्द में

पंचलाइट की कहानी में 15 महीनों से दंड जुर्माने के पैसे महतो टोली के लोग इकट्ठे करते हैं और रामनवमी के मेंले में जाकर पेट्रोमैक्स खरीद लेते हैं पेट्रोमैक्स को यह लोग पंचलाइट कहते हैं !

उनके गांव में सब पंचायत मिलाकर आठ थी और हर जाति की अलग-अलग पंचायत थी फिर वह उनमें से ₹10 बच जाते हैं फिर पूजा का सामान खरीद लेते हैं फिर वह घर आने लगते हैं !

रास्ते में उन्हें एक पंडित ठोक देता है कि लालटेन कितने रुपए का खरीदा तो महतो टोली के लोग कहते हैं ! कि इन लोगों को अपनी डिब्रि भी बिजली लगती है ! और दूसरों की पंच लाइट को यह लोग लालटेन कहते हैं !

फिर वह अपने घर आ जाते हैं घर पर आने के बाद सभी लोग खुशियां मनाते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात आती है क्या पंचलाइट को जल आएगा कौन क्योंकि वह लोग पंचलाइट को जलाना नहीं जानते थे !

फिर गोधन को बुलाया जाता है गोधन को पंचलाइट से अलग किया जाता है वह सलीमा का गाना गाता था इसीलिए उसको पंचायत से भगा दिया गया था !

फिर गुलरी काकि जाकर बुला कर लेकर आती हैं और वह पंचायत में आकर पंच लइट को जलाता है पंच लाइट जलाने के बाद पंचायत के लोग उससे बहुत खुश होते हैं !

और उसे आने जाने देते हैं फिर गुलरी का कि अपने घर लेकर जाती है दावत खिलाती है यह कहानी है पंचलाइट की
!

दोस्तों में उम्मीद करता हो की यह पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा इसमें आपको सब याद हो गया होगा !

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